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Wednesday, January 9, 2019

एक ऐसा गांव जो रातों रात गायब हो गया जानिए कैसे


हिन्दूस्तान की पारंपरिक धरती में बहुत ऐसे राज दफन हैं जो कई साल या कहें सदियों बाद आज भी उसी तरह ताजा और अनसुलझे हैं जितने पहले कभी होते थे । ये रहस्य कुछ ऐसे हैं जिन्हें जितना
जानने की कोशिश होती है ये उतना ही उलझते जाते हैं । ऐसा ही एक राज राजस्थान के जैसलमेर जिले के गाँव कुलधरा  में भी दफन है । यह गांव पिछले 170 वर्षों से वीरान पड़ा है । एक ऐसा गांव जो रातों रात  वीरान हो गया और सदियों से लोग आजतक नहीं समझ पाए कि आखिर इस गांव के वीरान होने का राज क्या था ।
कुलधरा गांव के वीरान होने का एक बहुत ही अजीब रहस्य है । दरअसल , कुलधरा की कहानी शुरू हुई थी । आज से लगभग 200 साल पहले , जब कुलधरा , खंडहर नहीं था बल्कि आसपास के 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों से आबाद हुआ करते थे । लेकिन फिर जैसे कुलधरा को किसी की बुरी नजर लग गई , वो शख्स था रियासत का  दीवान सालम सिंह । अय्याश दीवान सालम सिंह जिसकी गंदी नजर गांव कि एक सुन्दर लड़की पर पड़ गयी थी । दीवान उस लड़की के पीछे इस कदर दीवाना था कि बस किसी तरह से उसे पाना चाहता था । उसने इसके लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना आरंभ कर दिया । हद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घरवालों को यह संदेश भिजवाया कि यदि अगले पूर्णमासी तक उसे लड़की ना मिली तो वह गांव पर आक्रमण कर लड़की को उठा ले जाएगा




गांववालों और  दीवान की ये लड़ाई अब एक कुंवारी लड़की के सम्मान और गांव के आत्मसम्मान की भी थी । गांव की चौपाल पर पालीवाल ब्राह्मणों की बैठक हुई और 5000 से ज अधिक परिवारों ने अपने सम्मान के लिए रियासत छोड़ने का निर्णय ले लिया । कहा जाता है  कि निर्णय लेने के लिए सभी 84 गांव के लोग एक मंदिर पर इकट्ठा हो गए और पंचायतों ने फैसला किया कि चाहे जो भी हो जाए पर अपनी लड़की उस दीवान को नहीं देंगे । अगली ही शाम कुलधरा कुछ यूं वीरान हुआ कि आज परिंदे भी उस गांव के अन्दर दाखिल नहीं होते । कहते हैं गांव छोड़ते समय उन ब्राह्मणों ने इस स्थान को श्राप दे  दिया था। आपको बता दें कि बदलते समय के साथ 82 गांव तो अब दोबारा बन गए , परंतु दो गांव कुलधरा और खाभा सभी प्रयासों के बाद भी अब तक आबाद नहीं हुए हैं । ये गांव अब India पुरातत्व विभाग के संरक्षण में हैं । जिसे दिन के उजाले में सैलानियों के लिए रोज खोल दिया जाता है।

कहा जाता है कि यह गांव रूहानी ताकतों के आधीन है । Tourist Place में बदल चुके इस गांव मे घूमने आने वालों के मुताबिक यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मणों की आहट आज भी सुनाई देती है  उन्हें वहां हर समय  ऐसा महसूस होता है जैसे कि कोई आसपास चल रहा है । बाजार के चहल पहल की आवाजें सुनाई देती हैं , महिलाओं के बात करने आवाज आती और उनकी चूड़ियों और पायलों की आवाज सुनाई देती रहती है । प्रशासन ने इस गांव की सरहद पर एक फाटक बनवाए है , जिसके पार दिन में तो पर्यटक घूमने आते रहते हैं लेकिन रात के समय इस फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं करता है ।
में दिल्ली से मई 2013 मे भूत प्रेत व आत्माओं पर रिसर्च करने वाली पेरानार्मल सोसायटी की टीम ने कुलधरा गांव में रात बिताई थी । उस टीम ने भी यह माना  कि यहां कुछ न कुछ असामान्य जरूर है । शाम के समय उनका ड्रोन कैमरा आसमान से गांव की फोटो ले रहा था परंतु उस बावड़ी के ऊपर आते ही वो कैमरा धरती पर आ गिरा । एसा महसूस हुआ मानो उस कैमरे को किसी ने गिराया हो । कुलधरा गाँव से हजारों परिवारों का पलायन हुआ यह सच है  , और ये भी सच है कि कुलधरा गाँव में आज भी राजस्थानी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है ।

अंशुल शर्मा ने बताया जो पेरानॉर्मल सोसायटी के उपाध्यक्ष  था कि हमारे पास एक डिवाइस है जिसका नाम गोस्ट बॉक्स है । इसके द्वारा  हम ऐसी जगहों पर रहने वाली आत्माओं से सवाल पूछते हैं । ऐसा ही हमने कुलधरा मे भी किया , जहां कुछ आवाजें भी आई और कहीं असामान्य रूप से आत्माओं ने अपने नाम भी बताए । 4 मई 2013 Saturday की रात में जो टीम कुलधरा गई थी । उनकी गाड़ियों पर बच्चों के हाथ के पंजो के  निशान मिले ।
यहाँ जो कोई भी यहां आता है वह इस गाँव मे खुदाई करने लग जाता है इसका कारण यह है की इतिहासकारों के मुताबिक पालीवाल ब्राह्मणों ने अपनी पूरी  संपत्ति जिसमें भारी मात्रा में सोना - चांदी और हीरे जवाहरात  उसे जमीन के अंदर दबा कर रखते थे । यही कारण है कि इस उम्मीद से कि शायद दौलत उनके हाथ लग जाए । यह गांव आज भी बहुत जगह से खुदा हुआ मिलता है ।

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